पुष्टि संवाददाता: चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ है। 9 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी के दाम दबाव में रहे। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक एक किलोग्राम चांदी की कीमत में 12,608 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है और इसका भाव करीब 2.44 लाख रुपये प्रति किलो रह गया है। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी के वायदा भाव में कमजोरी देखने को मिली।

बीते आठ दिनों के दौरान चांदी की कीमतों में करीब 22,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है। 31 मई 2026 को चांदी का भाव 2,63,350 रुपये प्रति किलो था, जो अब घटकर लगभग 2.44 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। इस तेज गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मौजूदा स्तर खरीदारी का अवसर है या कीमतों में आगे भी नरमी जारी रह सकती है।
साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने रिकॉर्ड तेजी दिखाई थी। 29 जनवरी 2026 को इसका भाव 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के चलते कीमतों में लगातार गिरावट आई। मौजूदा स्तर पर चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 1.42 लाख रुपये प्रति किलो नीचे कारोबार कर रही है।
देश के प्रमुख शहरों में चांदी के भाव लगभग समान बने हुए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में चांदी का भाव 2.60 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास है, जबकि चेन्नई, हैदराबाद, भुवनेश्वर और कटक में यह करीब 2.70 लाख रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण निवेशकों का रुझान सोना-चांदी से हटकर अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने भी बाजार में अनिश्चितता पैदा की है।
जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट अवसर साबित हो सकती है, लेकिन निवेश का फैसला लेने से पहले बाजार जोखिमों का आकलन करना जरूरी है। चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी, स्थानीय मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं।

