तेहरान/दोहा: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच कतर के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कतर के गैस और एलएनजी (LNG) क्षेत्र पर असर पड़ा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच कई महीनों से चल रहे सैन्य टकराव के दौरान ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।
इसी बीच तेहरान और वाशिंगटन के बीच शांति समझौते की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। खबरों के अनुसार दोनों पक्ष युद्धविराम और समुद्री व्यापार को सामान्य करने पर चर्चा कर रहे हैं, हालांकि जमीनी स्तर पर सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। हाल के दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास ड्रोन और मिसाइल घटनाएं भी सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा अवसंरचना पर हमले जारी रहे तो तेल और गैस की कीमतों में फिर से तेज उछाल आ सकता है। इससे एशिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल क्षेत्र में तनाव और कूटनीतिक प्रयास दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात फिर बिगड़ सकते हैं।
Credit : Ajj tak news

