Masood Azhar News: जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों से जुड़ा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर मसूद अजहर और उसके संगठन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाता रहा है।
मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर इस पुराने सवाल को चर्चा में ला दिया है कि आखिर इतने लंबे समय तक वह पाकिस्तान में कैसे सुरक्षित रहा और अब उसके खिलाफ इनाम बढ़ाने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
कौन है मसूद अजहर?
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख माना जाता है। यह संगठन भारत में कई आतंकी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
मसूद अजहर का नाम वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद भी प्रमुखता से सामने आया था। यात्रियों की रिहाई के बदले भारत सरकार ने मसूद अजहर समेत कुछ आतंकियों को रिहा किया था।
इसके बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद के जरिए भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
पठानकोट और पुलवामा हमलों से जुड़ा नाम
मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों की जांच में सामने आया है।
पठानकोट एयरबेस हमला (2016) और पुलवामा आतंकी हमला (2019) उनमें प्रमुख हैं। पुलवामा हमले में CRPF के 40 जवानों की मौत हुई थी।
भारत ने इन हमलों के पीछे जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका का आरोप लगाया था और मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार उठाता रहा है।
पाकिस्तान में इतने सालों तक क्यों रहा चर्चा में?
मसूद अजहर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। भारत का आरोप रहा है कि पाकिस्तान ने उसके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की और उसे वहां संरक्षण मिलता रहा।
दूसरी ओर, पाकिस्तान कई बार अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने देने की बात कहता रहा है।
यही वजह है कि मसूद अजहर का मामला दोनों देशों के बीच आतंकवाद को लेकर सबसे बड़े विवादित मुद्दों में शामिल रहा है।
₹70 लाख के इनाम की चर्चा क्यों?
मसूद अजहर के खिलाफ इनाम बढ़ाए जाने की खबर सामने आने के बाद इस मामले ने फिर से जोर पकड़ लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इनाम की राशि बढ़ाकर करीब 70 लाख रुपये किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इस कदम को केवल इनाम की राशि के आधार पर पाकिस्त
