बुर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए शुरू हुई शांति वार्ता पहले ही दिन बड़े गतिरोध का शिकार हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक से वॉकआउट कर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच समझौते की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
सूत्रों के अनुसार, स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते को आगे बढ़ाना और क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना था। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी मौजूद थे।
ट्रंप के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव
बैठक शुरू होते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान समर्थित समूहों ने लेबनान में हमले नहीं रोके तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्वरूप वार्ता कक्ष छोड़ दिया।
हालांकि ईरान ने प्रत्यक्ष बातचीत से दूरी बना ली है, लेकिन कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों पक्षों के बीच संपर्क जारी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और गतिरोध दूर करने के प्रयास जारी हैं।
हॉरमुज जलडमरूमध्य बना नई चिंता
कूटनीतिक तनाव के साथ-साथ ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या एक दिन में 26 से घटकर केवल 5 रह गई, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 2.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉरमुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
दुनिया की नजर अगले कदम पर
जर्मनी समेत कई देशों ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई है। वहीं अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी कड़ा रुख देखने को मिल रहा है। कुछ अमेरिकी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि वार्ता विफल होती है तो अमेरिका हॉरमुज जलमार्ग की सुरक्षा के लिए सीधे हस्तक्षेप कर सकता है।

